गेंदे का फूल: इतिहास, उत्पत्ति, भारत में आगमन और खेती की पूरी जानकारी
नमस्ते दोस्तों, JB Story Hindi में आपका स्वागत है! आज हम बात करेंगे एक ऐसे फूल की, जो भारत में हर मंदिर, शादी, त्योहार, घर और अंतिम संस्कार में छाया रहता है – गेंदा (Marigold)। पीला-नारंगी रंग, तेज महक और चमकदार फूलों वाला यह पौधा हमें खुशहाली, शुभता और सुरक्षा का प्रतीक लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गेंदा भारत का देसी फूल नहीं है? यह विदेशी है और हजारों मील दूर मेक्सिको से आया है।
इस पोस्ट में हम गेंदे की पूरी हिस्ट्री, उत्पत्ति, भारत में कैसे आया, सांस्कृतिक महत्व, औषधीय गुण, खेती कैसे करें और कई रोचक तथ्य विस्तार से जानेंगे। चलिए शुरू करते हैं!
गेंदे का वैज्ञानिक नाम और मुख्य प्रकार
गेंदे का वैज्ञानिक नाम है Tagetes (टैगेटीस)। यह Asteraceae परिवार का पौधा है। भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार उगाए जाते हैं:
• Tagetes erecta → अफ्रीकी गेंदा (African Marigold)
बड़े-बड़े फूल, पौधा 2-3 फीट तक ऊँचा, मुख्य रूप से पीला और नारंगी रंग।
• Tagetes patula → फ्रेंच गेंदा (French Marigold)
छोटे फूल, पौधा 1 फीट तक, रंग पीला-भूरा, लाल-नारंगी मिक्स।
• Tagetes tenuifolia → सिग्नेट गेंदा (Signet Marigold)
छोटे-छोटे फूल, पतले पत्ते, कम इस्तेमाल होता है।
ये सभी प्रजातियाँ मूल रूप से मेक्सिको और मध्य अमेरिका की हैं।
गेंदे की उत्पत्ति और असली घर

गेंदा (Tagetes) का मूल स्थान मेक्सिको और मध्य अमेरिका (ग्वाटेमाला, होंडुरास, कोस्टा रिका) है। यहाँ से यह प्राचीन काल में ही फैलना शुरू हुआ।
• एज़्टेक सभ्यता (Aztec Civilization – 14वीं-16वीं शताब्दी) में गेंदे को cempasúchil या cempoalxóchitl कहा जाता था। इसका मतलब है "20 (या 400) फूलों वाला"।
• एज़्टेक इसे सूर्य देवता का उपहार मानते थे। वे इसे मृतकों की पूजा में इस्तेमाल करते थे – आज भी मेक्सिको में "Day of the Dead" (Día de los Muertos) में गेंदे की मालाएं और पंखुड़ियाँ रास्ता बनाने के लिए बिछाई जाती हैं। वे मानते थे कि इसकी तेज महक मृत आत्माओं को उनके घर तक लौटने का रास्ता दिखाती है।
• एज़्टेक इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल करते थे – घाव भरने, पेट दर्द, कीड़े मारने और त्वचा रोगों में।
भारत में गेंदा कब और कैसे आया?
गेंदा भारत का मूल निवासी नहीं है – यह विदेशी पौधा है।
• 16वीं शताब्दी में स्पेनिश और पुर्तगाली व्यापारी (Portuguese और Spanish explorers) ने मेक्सिको से गेंदे के बीज पहले यूरोप लाए और फिर भारत लाए।
• पुर्तगाली भारत में गोवा, दमन, दीव और अन्य इलाकों पर कब्जा कर चुके थे। वे 1500-1600 ईस्वी के बीच गेंदे को भारत लाए।
• कुछ इतिहासकार मानते हैं कि 350-400 साल पहले (1600-1650 ईस्वी के आसपास) यह भारत में लोकप्रिय हो गया।
• पहले भारत में पूजा में कैलेंडुला (Calendula officinalis – यूरोप से आया) इस्तेमाल होता था, लेकिन गेंदे (Tagetes) ने उसकी जगह ले ली क्योंकि यह ज्यादा टिकाऊ, महकदार और सस्ता था।
• जल्द ही गेंदा भारत की हर जगह फैल गया और आज इसे देसी फूल ही समझा जाता है।
भारत में गेंदे का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
गेंदा भारत में इतना घुल-मिल गया कि अब इसे विदेशी कहना भी अजीब लगता है। इसका उपयोग:
• शादी-विवाह: मंडप सजाने, द्वार पर लटकाने, दूल्हा-दुल्हन के गले में मालाएं।
• त्योहार: दीवाली, दशहरा, होली, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, रक्षाबंधन – हर जगह गेंदे की मालाएं।
• मंदिर और पूजा: भगवान को चढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल। रोज सुबह मंदिरों में गेंदे की मालाएं बिकती हैं।
• अंतिम संस्कार: श्मशान में गेंदे की मालाएं और पंखुड़ियाँ बिछाई जाती हैं – मृत आत्मा को शांति देने के लिए।
• रोजमर्रा: घर में सजावट, बालों में लगाना, चावल में पीला रंग देने के लिए।
गेंदे के औषधीय गुण (Medicinal Benefits)
गेंदा सिर्फ सुंदर नहीं, बल्कि औषधि भी है:
• एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल – संक्रमण से बचाव।
• घाव भरने, त्वचा रोग (एक्जिमा, फंगल इंफेक्शन) में उपयोग।
• आंखों की जलन, सूजन कम करने में।
• कीट-नाशक – बगीचे में कीड़े भगाने के लिए पौधा लगाया जाता है।
• आयुर्वेद में पेट दर्द, कब्ज, सिरदर्द और जोड़ों के दर्द में इस्तेमाल।
• आधुनिक रिसर्च में गेंदे के एक्सट्रैक्ट को एंटी-कैंसर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मिले हैं।
गेंदे की खेती कैसे करें? (पूर्ण गाइड)
गेंदा उगाना बहुत आसान है – गरीब किसानों के लिए अच्छा बिजनेस भी है।
• मिट्टी: हल्की दोमट, अच्छी जल निकासी वाली।
• बीज बोने का समय: मई-जुलाई (बरसात) और सितंबर-जनवरी (सर्दी)।
• धूप: रोज 5-6 घंटे जरूरी।
• पानी: नियमित लेकिन ज्यादा नहीं – मिट्टी हाइड्रेटेड रखें।
• अंकुरण: 5-7 दिन में।
• ऊँचाई: 1 से 5 फीट।
• कटाई: फूल पूरी तरह खुलने पर सुबह या शाम।
• किस्में: अफ्रीकन (बड़े फूल, ज्यादा मालाएं), फ्रेंच (छोटे फूल, ज्यादा रंग)।
• उपज: एक एकड़ में 10-15 टन फूल सालाना।
रोचक तथ्य जो शायद आप नहीं जानते
• मेक्सिको में गेंदे को "फूल ऑफ द डेड" कहते हैं – Day of the Dead में रास्ता बनाने के लिए बिछाया जाता है।
• इंदिरा गांधी को गेंदे से एलर्जी थी – उनके पास कभी गेंदे का फूल नहीं लाया जाता था।
• मुर्गी के दाने में गेंदे के फूल डालकर अंडे का पीला भाग चटकदार बनाते हैं।
• गेंदा आसानी से उगता है – इसलिए गरीब किसानों के लिए अच्छा बिजनेस है।
• एक समय में यूरोप में इसे "मैरी गोल्ड" (Mary's Gold) कहा जाता था – मदर मेरी से जुड़ा।
निष्कर्ष
गेंदा भले ही मेक्सिको से आया हो, लेकिन भारत में इसने इतनी जगह बना ली कि अब इसे देसी ही समझा जाता है। यह खुशी, शुभता, पूजा और संस्कृति का प्रतीक बन गया। अगली बार जब आप मंदिर में गेंदे की माला चढ़ाएँ या शादी में देखें, तो याद रखिएगा – ये फूल हजारों मील की यात्रा करके आपके घर तक आया है।
क्या आप गेंदे की खेती करते हो या इसके बारे में कोई अनुभव है? कमेंट में बताइए!
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